Tuesday, 12 January 2010

चिंता

आज चारों ओर मिडियोक्रेसी इतनी बढ़ गयी है कि समाज का कोई भी पद उससे अछूता नहीं रहा .सबसे दुखद पहलू  तो यह है कि समाज के उच्चतम मानकों एवं मूल्यों वाले  क्षेत्र पर भी इसकी  छाया  पड़ रही  है.शिक्षा,स्वास्थ्य ,कला ,पत्रकारिता,न्याय ,विधि ,प्रशासन  ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जो अपने नैतिकता के उच्च मानदंडो पर खरा उतरता  हो.दूसरे दर्जे के और दोयम स्तर के लोगो को इतना अधिक महत्व हर स्तर पर मिलता है कि सच्चे लोग कई बार स्वयं को हतप्रभ पाते  है.मिडियोक्रेसी का दायरा इतना बड़ा है और उनकी नेटवर्किंग इतनी अच्छी है कि गूगल का सर्च इंजिन भी शर्मा जाए .कमीशनखोरी आज इतनी है कि उच्च पदों पर बैठे लोगे भी बेशर्मी से  अपने उपरवाले का हवाला देते हुए कमीशन मांगते है .सरकारी पैसे का दुरूपयोग देखना हो तो सरकारी संस्थानों को देखिये .जहा बिजली,फ़ोन,चाय,कागच.पेन का एक दिन का खर्चा ही एक परिवार के पेट भरने को काफी होगा.उच्य पदों पर आज काबिल व्यक्ति कम है बल्कि राजसत्ता के गलियारों में घुमने वाले अवसरवादी व्यक्ति अधिक है जो पदों पर बैठकर उनका एवं स्वयं के परिचितों का उद्धार करने मै जुट जाते है.एक अच्छा शिक्षक,एक अच्छा डॉक्टर या इंजिनियर,कलाकार ,पत्रकार ,वकील या कलेक्टर आज कि व्यवस्था में क्या करे , मात्र इतना ही कि वह स्वयं को भ्रस्टाचार मै लिप्त न करके अपना काम ईमानदारी से करे.पर वहा भी उसे प्रताड़ना का सामना करना पड़ेगा.वह दूसरो के लिए लाभप्रद नहीं रहेगा सो उसे परेसान किया जायेगा. एक नई सामाजिक क्रांति ही इसका एकमात्र विकल्प है पर वह क्रांति और परिवर्तन पूर्ण रूप से अहिंसक ,मानवतापूर्ण ,एवं कल्याणकारी होनी चाहिए . दोस्त आलोक 10:55 am bhopal