Monday, 22 February 2010

उमंग और उत्साह ही स्रजनात्मक ऊर्जा है.

जनवरी फ़रवरी 2010 बहुत व्यस्त रहा. जनवरी 26 को शहडोल में आजाद का बहुत अच्छा शो हुआ. दर्शक खचाखच थे और नाट्य प्रस्तुति को उन्होंने बहुत उदारता से ग्रहण किया. फिर 30 से 3 तक वर्धा में था. सेवाग्राम नाम से एक टेलीफिल्म बनाई जो गोवा फिल्म फेस्टिवल में जाएगी. फिर 4 फरवरी को उज्जैन में मेरा सम्मान था और ऐसा ही होता है का शो भी. अशोक वाजपेई और पियूष भाई आये थे, अच्छा लगा. 6 फरवरी से ग्रीन वैली स्कूल में काम शुरू किया. और आज २२ फरवरी रविन्द्र भवन में बच्चे आजाद प्रस्तुत कर रहे है. साथ ही ग्रुप में जसमा ओढ़न पर काम शुरी हुआ है. मार्च में उड़ीसा जाना है. मई में लखनऊ बीच में काठमांडू भी जाना है. मेरे सात आर्टिकल छप गए है. उत्साह लग रहा है. उमंग और उत्साह ही स्रजनात्मक ऊर्जा है.

No comments:

Post a Comment