आज मुम्बई जा रहा हूं, कल से नाटक की ब्लाकिंग शुरु करनी है। फिल्म एक्टर्स के साथ नया अनुभव।
ओ! मस्तक विराट! अभी नहीं मुकुट, अभी नहीं अलंकार! अभी नहीं तिलक, अभी नहीं राज्य-भार! एक दिन माथे मेरे, सूर्य होगा उदीय, इतना पर्याप्त मुझे अभी! -कुंअर नारायण सिंह "एक्टिंग इज इटरनल जर्नी टु नो द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर." -मर्लिन ब्रांडो
Monday, 18 October 2010
भद्रजन हर कहीं गंदगी और कचरा फैलाने में मशगूल
मैंने कई बार पाया कि हम भारतीय भद्रजन हर कहीं गंदगी और कचरा फैलाने में मशगूल हैं, यह अहसास पिछले दिनों और अधिक पुख्ता हो गया जब बौद्ध (गया) मंदिर में मैंने देखा वहां एक सज्जन हाथ से झाडू लगा रहे थे और दूसरे हाथ से प्रसाद बांट रहे थे। कुछ लोग थूकने में व्यस्त थे। इन सबके बीच राष्ट्रीय समुदाय के पर्यटक अचंभित होकर देख रहे थे कि इस समाज में बुद्ध कहां से आए होंगे या शायद इस समाज के लिए ही बुद्ध का जन्म हुआ हो। नमो: बुद्धाय
Tuesday, 5 October 2010
लगा की यूरोप के किसी शहर में बैठे है.
3 अक्टूबर 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुहत देखकर लगा नहीं की ये खेल भारत में हो रहे है. यूँ लगा की यूरोप के किसी शहर में बैठे है.
आखिर युवा भारत ने दिखाई परिपक्वता
30 सित 2010 भारत के इतिहास का एक स्वर्णिम दिन, युवा भारत ने राजनीति और धर्म के ठेकेदारों को ठेंगा दिखा दिया. मंदिर मस्जिद के नाम पर अपनी दुकाने चलने वाले सावधान. अब तुम्हारे बुरे दिन शुरू हो गए. आखिर युवा भारत ने परिपक्वता दिखाई
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