ओ! मस्तक विराट!
अभी नहीं मुकुट,
अभी नहीं अलंकार!
अभी नहीं तिलक,
अभी नहीं राज्य-भार!
एक दिन माथे मेरे,
सूर्य होगा उदीय,
इतना पर्याप्त मुझे अभी!
-कुंअर नारायण सिंह
"एक्टिंग इज इटरनल जर्नी टु नो द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर."
-मर्लिन ब्रांडो
Tuesday, 5 October 2010
लगा की यूरोप के किसी शहर में बैठे है.
3 अक्टूबर 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुहत देखकर लगा नहीं की ये खेल भारत में हो रहे है. यूँ लगा की यूरोप के किसी शहर में बैठे है.
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