ओ! मस्तक विराट!
अभी नहीं मुकुट,
अभी नहीं अलंकार!
अभी नहीं तिलक,
अभी नहीं राज्य-भार!
एक दिन माथे मेरे,
सूर्य होगा उदीय,
इतना पर्याप्त मुझे अभी!
-कुंअर नारायण सिंह
"एक्टिंग इज इटरनल जर्नी टु नो द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर."
-मर्लिन ब्रांडो
Tuesday, 15 February 2011
मिलाद-उन-नबी की सभी को शुभकामनाएं
मिलाद-उन-नबी की सभी को शुभकामनाएं, बसंत का पर्व चल रहा है। सृष्टि, प्रतिक्षण, क्रियाशील और परिवर्तनशील है। मनुष्य को भी अपने कर्म और स्वभाव में प्रकृति को अनुसरण करना चाहिए।
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