पिछले दस दिनों से लखनऊ में था, भारतेन्दू नाट्य अकादमी में काम कर रहा था, सुबह 7 से रात 1 बजे तक काम ही काम, इससे अच्छा और क्या हो सकता है।बीएनए द्वितीय वर्ष के छात्रों के साथ वेस्टर्न रियलिस्टीक वर्क, 2 घंटे का प्रजेन्टेशन ऑडिटेरियम में किया, चेखव, इबसन, मिलर सब मंच पर जीवित हो उठे।
लखनऊ के पास देवा शरीफ गया, सूफी संत वारिश शाह की दरगाह वहां है, बड़ा अच्छा लगा
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