ओ! मस्तक विराट!
अभी नहीं मुकुट,
अभी नहीं अलंकार!
अभी नहीं तिलक,
अभी नहीं राज्य-भार!
एक दिन माथे मेरे,
सूर्य होगा उदीय,
इतना पर्याप्त मुझे अभी!
-कुंअर नारायण सिंह
"एक्टिंग इज इटरनल जर्नी टु नो द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर."
-मर्लिन ब्रांडो
Thursday, 18 November 2010
देवउठनी ग्यारस और ईद भी बहुत अच्छा,
देवउठनी ग्यारस और ईद भी बहुत अच्छा, मैं मौत के साय में का शो करके सफलतापूर्वक भोपाल वापस आय़ा।
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