ओ! मस्तक विराट!
अभी नहीं मुकुट,
अभी नहीं अलंकार!
अभी नहीं तिलक,
अभी नहीं राज्य-भार!
एक दिन माथे मेरे,
सूर्य होगा उदीय,
इतना पर्याप्त मुझे अभी!
-कुंअर नारायण सिंह
"एक्टिंग इज इटरनल जर्नी टु नो द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर."
-मर्लिन ब्रांडो
Wednesday, 10 November 2010
जय रंगमंच
भोपाल लौटा हूं, दो दिन हुए, फिर मुम्बई और पूना। ‘मौत के साये’ में का शो है। फ्लाइट पकड़नी है। भोपाल लौटकर ताम्रपत्र की रिहर्सल में जुटना है। आदि विद्रोह में शो है। जय रंगमंच
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