Wednesday, 10 November 2010

जय रंगमंच

भोपाल लौटा हूं, दो दिन हुए, फिर मुम्बई और पूना। ‘मौत के साये’ में का शो है। फ्लाइट पकड़नी है। भोपाल लौटकर ताम्रपत्र की रिहर्सल में जुटना है। आदि विद्रोह में शो है। जय रंगमंच

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