Monday, 13 September 2010

बाबा प्रणाम

कल शाम को कारंत जी की व्याख्यान माला में गया, ऐसा महसूस होता है कि कारंत जी आज भी हमारे बीच मौजूद है। अपने विद्यार्थीयों के काम में वे प्रतिध्वनित हो रहे हैं। अच्छाई का कोई अंत नहीं होता। परन्तु आज के मीडियोकर थियेटर सीन को देखकर वे क्षुब्ध अवश्य हों, हम अच्छा काम कर सकें यही आशीर्वाद मांगते हैं।

1 comment:

  1. Alok ji! shraddhey Karant ji ko yad karna vakai sukhad hai. unko mera bhi pranam.

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