Sunday, 5 September 2010

कलाओं का घर भारत भवन!

गतांक से आगे.....
कोई क्रिएटिव बहस, रचनापाठ, नई पुस्तक, संगीत, फिल्म या मेरिंग्स पर चर्चा पर चर्चा करते भी शायद ही कोई मिलेगा|
यदि राज्य सरकार और संस्कृति विभाग चाहे तो भारत भवन को राज्य के संग्रहालय के रूप में विकसित किया जा सकता है| यहाँ मूल इन्फ्रास्ट्रक्चर तो है ही, विभिन्न कला माध्यमों में राज्य के जिन भी कलाकारों ने योगदान दिया है, उनके जीवन-परिचय, कृतित्व,फोटोग्राफ़्स, सीडी-डीवीडीज, को संकलित कर एक प्रदर्शनी में बदला जाए| चुनिन्दा संग्रह की एक टूरिंग प्रदर्शनी भी बनायी जा सकती है जो विभिन्न महोत्सवों में, अन्य राज्यों में, मध्यप्रदेश का सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व कर सकती है| राज्य संग्रहालय नाट्य एवं लोक कलाओं के साथ नृत्य व संगीत की फिल्म बनाकर उनका एक राज्य स्तरीय समारोह किया जा सकता है, जिसमें दूसरे राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल हों ताकि प्रदेश के कला गौरव को व्यापक परिदृश्य पर स्थापित किया जा सके|
       मध्यप्रदेश की लोक, नागर, आधुनिक कलाओं को सहेजने और एक जगह प्रदर्शित करने में राज्य संग्रहालय अपनी एक विशिष्ट भूमिका निभा सकता है| मध्यप्रदेश कला गौरव नाम से एक राष्ट्रीय कला पुरस्कार मूल रूप से मध्यप्रदेश के कलाधर्मी को दिया जा सकता है| यह शिखर पुरस्कार से भिन्न हो|
      प्रदेश के कलाकारों का जीवन-परिचय विवरणी, डाक पता, दूरभाष, ई-मेल और वेबसाइट राज्य संग्रहालय के पास होना चाहिए| और एक कला माध्यमों की निर्देशिका भी प्रकाशित करनी चाहिए| एक  मासिक कला पत्रिका, जिसमें प्रदेश भर के कलाधर्म की जानकारी हो, का प्रकाशन बांछ्नीय है| कलावार्ता अपने दायित्व में विफल हो गयी है|            
    विभिन्न कला माध्यमों पर प्रत्येक पंद्रह दिन में एक संगोष्ठी का आयोजन होना चाहिए, इससे बौद्धिक विकास को गति मिलेगी एवं सूचना के तर्कशील आदान-प्रदान की गुंजाइश बनी रहेगी|
      यदि भविष्य में, मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय या रंगमंडल की स्थापना होती है तो यहाँ के तीनों प्रेक्षागृहों का प्रयोग प्रशिक्षण और प्रदर्शन हेतु किया जा सकता है| इस तरह संग्रहालय मात्र जड़ न होकर प्रवाहशील बना रहेगा|
हमारे और देश के अन्य भागों के कलाधर्मियों के लिए यह एक कलातीर्थ के रूप में विकसित होगा, जहाँ मात्र दर्शक या कलाकार ही नहीं, बल्कि कला-शोधार्थी के लिए भी यह एक महत्त्वपूर्ण केंद्र होगा|
      और अंत में, आज दुनिया के आधुनिक और विकसित देशों की तो बात ही छोड़ दें तो भी इरान, ईराक, टर्की और मिस्र जैसे देशों में भी नेशनल आर्ट यूनिवर्सिटीज़ हैं, पर हमारे यहाँ पुरातत्त्व संग्रहालय तो है पर ज़िंदा, जाग्रत व सक्रिय राज्य कला संग्रहालय अभी भी एक कल्पना या विचार मात्र है!

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