Wednesday, 2 December 2009

लियो तोल्स्तोय की कहानियाँ: "धर्मपुत्र" एवं "प्रेम में ईश्वर"!

एक दिसंबर को लियो तोल्स्तोय की दो कहानियों  "धर्मपुत्र" एवं "प्रेम में ईश्वर" का मंचन भारतीय रंगमंच पर पहली बार "दोस्त" ने कला अकादमी, भोपाल में किया|

             ऐसी सरल मानवीय एवं करुणात्प्रेरक कहानियों से मेरा पहली बार सामना हुआ| हालाँकि इससे पहले विभिन्न रचनाकारों की सौ से ऊपर कहानियाँ मैं पूर्व में भी कर चुका हूँ; लेकिन जीवन की छोटी घटनाओं से गहन सत्य की खोज, मानवीय व्यवहार में ही ईश्वर का साक्षात्कार प्रतिक्षण प्रेम द्वारा करना; इनको मंच पर प्रस्तुत करना एक चुनौती थी| परन्तु दर्शकों ने भावविभोर होकर प्रस्तुति देखी एवं स्वयं को कहानियों में महसूस करते हुए अपनी जीवन कहानी को उसमें देखा; अनुभूत किया; ये बड़ी बात है| दर्शक कम थे परन्तु दुनिया में समझदार कम ही होते हैं और इससे उनका महत्त्व भी समझ आता है| दर्शकों में पत्रकार, विद्यार्थी, शिक्षक, घरेलू लोग और रंगमंच से जुड़े लोग थे और आश्चर्य यह कि मंच पर उपस्थित कलाकारों का प्रतिनिधित्व भी इन्हीं वर्गों द्वारा हो रहा था| कारंतजी कहते थे- रंगमंच सामूहिक तो है ही सामुदायिक भी यानी कम्युनिटी ओरिएंटेड भी होता है और इसी में रंगमंच की ऊर्जा और चेतना निहित है| समय: १०:४७ प्रात: |
दोस्त आलोक

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