ओ! मस्तक विराट! अभी नहीं मुकुट, अभी नहीं अलंकार! अभी नहीं तिलक, अभी नहीं राज्य-भार! एक दिन माथे मेरे, सूर्य होगा उदीय, इतना पर्याप्त मुझे अभी! -कुंअर नारायण सिंह "एक्टिंग इज इटरनल जर्नी टु नो द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर." -मर्लिन ब्रांडो
Saturday, 28 November 2009
बाबा के नाम
आज 26 नवम्बर 2009 को
मेरी रंगयात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव.
मध्यप्रदेश में पहली बार
कोई नाटक पूरी तरह से
ऑडियो ट्रैक पर अंग्रेजी भाषा में
रंगमंच पर खेला जायेगा.
साउंड ऑफ़ म्यूजिक ब्राडेव का मशहूर म्यूजिकल है.
इसमे औदेर एअर एम्फी थियेटर में
बदलते फ्लेक्स सेट और संगीतबद्ध
कोरियोग्राफी के साथ
संस्कार वैली स्कूल के बच्चो के साथ कर रहा हूँ.
इसके पहले टैगोर कि तोता कहानी,
प्रेमचंद का ईदगाह, व्यास का उस्मंगम कर चुका हूँ.
पर ये नया रंगानुभव है मेरे लिए भी.
साथ ही मध्यप्रदेश और भोपाल के रंगमंच के लिए.
इसी भोपाल में कारन्त जी ने मेरी रंगदिक्षा कि थी.
कारन्त बाबा तुम्हें प्रणाम...
आज गुरुवार है..
गुरूजी अपने आलोक को आशीर्वाद दीजिये....
और मेरा प्रणाम स्वीकार कीजिये.
बाबा आपका ही.
आलोक
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