Monday, 26 October 2009

ओ! मस्तक विराट!

ओ! मस्तक विराट!
अभी नहीं मुकुट,
अभी नहीं अलंकार!
अभी नहीं तिलक,
अभी नहीं राज्य-भार!
एक दिन माथे मेरे,
सूर्य होगा उदीय,
इतना पर्याप्त  मुझे  अभी!
-कुंअर नारायण सिंह

"एक्टिंग इज इटरनल जर्नी  टु नो  द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर." -मर्लिन ब्रांडो

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