
प्यारे सनी!
तुम्हें पता नहीं, लेकिन मैं तुम्हें बता रहा हूँ कि जिस दिन तुम पैदा हुए यानी १३ नवम्बर; डॉक्टर स्वामी के अस्पताल में, बेचैन घूम रहा था; सिजेरियन केस था, इसलिए मुझे याद है सनी, सुबह ७ बजे "पाश" की कवितायें पढ़ रहा था, "मैं तो घास हूँ, आपके किए-धरे पर फिर उगा हूँ", ७:२७ पर डॉक्टर ने सूचित किया, "सँभालिये अपने पहलवान को" मुझे याद है कि तुम हरे रंग की ट्रे में पड़े थे और तुम्हारी तब तक नाल भी नहीं काटी गई थी तुम मुस्करा रहे थे तुम्हारा रंग बहुत गोरा था, पाँव गुलाबी थे ये चित्र मेरी आँखों से मिट नहीं सकता न मुझे इसे याद करने की आवश्यकता है ये तो बस है!
तुम्हें पता नहीं, लेकिन मैं तुम्हें बता रहा हूँ कि जिस दिन तुम पैदा हुए यानी १३ नवम्बर; डॉक्टर स्वामी के अस्पताल में, बेचैन घूम रहा था; सिजेरियन केस था, इसलिए मुझे याद है सनी, सुबह ७ बजे "पाश" की कवितायें पढ़ रहा था, "मैं तो घास हूँ, आपके किए-धरे पर फिर उगा हूँ", ७:२७ पर डॉक्टर ने सूचित किया, "सँभालिये अपने पहलवान को" मुझे याद है कि तुम हरे रंग की ट्रे में पड़े थे और तुम्हारी तब तक नाल भी नहीं काटी गई थी तुम मुस्करा रहे थे तुम्हारा रंग बहुत गोरा था, पाँव गुलाबी थे ये चित्र मेरी आँखों से मिट नहीं सकता न मुझे इसे याद करने की आवश्यकता है ये तो बस है!
तुम्हें तुम्हारे स्वर्णिम भविष्य हेतु शुभकामनाएँ! कार्यक्षेत्र में पराक्रमी बनो!!
दोनों बाँहों में तुम्हारे लिए असीमित प्यार लिए तुम्हारा पिता!!!
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