Thursday, 17 February 2011

हर धर्म के सिद्धांत एक ही बात कहते हैं

आज शुक्रवार है, हिन्दुओं में महालक्ष्मी का दिन और मुस्लिम भाईयों का जुम्मा। यदि देखें तो मूल में हर धर्म के सिद्धांत एक ही बात कहते हैं। तो फिर झगड़ा है कहां, जवाब है नेताओं में 

इंसान का भी कोई चरम लक्ष्य होना चाहिए

जब दुनिया में पत्थर का भी कोई मकसद है और फूल का भी, तो इंसान का भी कोई चरम लक्ष्य होना चाहिए। उसके बिना वो पूछ विहीन जानवर है। 

चाहने, भूलने और यादों के सफर का नाम है ज़िदगी...


चाहना और भूलना,
भूल कर फिर याद करना,
याद करते हुए भूल जाना फिर,
चाहने, भूलने और यादों के सफर का नाम है ज़िदगी...

Tuesday, 15 February 2011

भोपाली युवा अतिउत्साहित

आरक्षण की शूटिंग में भोपालवासी अति उत्साह दिखा रहे हैं। कई बार प्रोडक्शन यूनिट के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। कुछ लोग तो स्किन ट्रीटमेंट कराकर रोल मांगते देखे जा सकते हैं। ऐसे लोगों में अधिकांश वह है जिन्हें फिल्म और अभिनय का क,ख,ग नहीं पता। आमीन

मिलाद-उन-नबी की सभी को शुभकामनाएं


मिलाद-उन-नबी की सभी को शुभकामनाएं, बसंत का पर्व चल रहा है। सृष्टि, प्रतिक्षण, क्रियाशील और परिवर्तनशील है। मनुष्य को भी अपने कर्म और स्वभाव में प्रकृति को अनुसरण करना चाहिए।

Monday, 14 February 2011

आज़ाद


27 फरवरी को ओरछा में आज़ाद का शो है। जब से यह नाटक लिखा गया, प्रतिवर्ष इसका कहीं न कहीं शो होता रहता है। यह आज़ाद की प्रस्तुति का चौथा वर्ष है। और इस बीच तीसरा आजाद आ गया। रंगमंच एक परंपरा है और ईमानदारी से की गई कोई भी कोशिश समझ आने पर उचित सुफल देती है।

यही है मेरा भारत महान


सारी प्रगति के बाद भी भारतीय समाज महिलाओं के प्रति दिनों दिन क्रूर और असहिष्णु होता जा रहा है। कहने को तो हम नारी को देवी का दर्जा देते हैं पर व्यवहार ढोरों के समान करते हैं। कहां है हमारी 5 हजार वर्ष पुरानी संस्कृति और सभ्यता। सड़कों पर तो भिखारी, कचरा, थूकते हुए लोग और कचौरी समोसा में पूरी दुनिया की समस्याएं हल करते लोग। यही है मेरा भारत महान। मकतूब

आरक्षण

आरक्षण  की शूटिंग हो गई। अच्छा अनुभव था। दीपिका और प्रतीक के साथ दृश्य था। दीपिका ज्यादा प्रोफेशनल लगी। प्रकाश झा एक निर्देशक के रूप में तकनीक पर कमाल की पकड़ रखते हैं। माहौल भी बहुत अनुशासित। कुल मिलाकर शानदार अनुभव। 

Wednesday, 9 February 2011

मकतूब


27 फरवरी को ओरछा में चन्द्रषेखर आज़ाद का शो है, भोपाल में कल से तैयारियां शुरू
आज सुबह प्रकाश झा से मुलाकात हुई, कल मेरा आरक्षण में शूट है, आज सीन पर चर्चा हुई।
दोपहर बाद एक रेडिया रिकॉर्डिंग है, अभी यूनिवर्सिटी जा रहा हूं, जीवन, सृजनषील और व्यस्त रहना चाहिए, तभी जीवन की सार्थकता है। मकतूब

Monday, 7 February 2011

बसंत पंचमी और निराला जयंती की सभी को शुभकामनाएं,




बसंत पंचमी और निराला जयंती की सभी को शुभकामनाएं, आईटीएफ इलाहाबाद में आज सुबह 8 बजे से हम लोगों ने काम शुरू किया, शाम को वापस भोपाल निकलना है।
ब्लॉग ट्वीट और फेसबुक पर निरंतर उपस्थित हूं। सम्पर्कों का दायरा बढ़ रहा है। विचारों और संदेशों का आदान प्रदान ही वास्तविक कम्यूनिकेशन है।

Sunday, 6 February 2011

‘ऐसा ही होता है’

इण्डियन फिल्म एण्ड थियेटर, इलाहाबाद में काम करने में बड़ा मजा आ रहा है। यहां के स्टूडेंट बहुत ब्रिलियेन्ट हैं। आज मेरा सोलो ‘ऐसा ही होता है’ यहां परफोर्म करने जा रहा हूं। अगस्त’05 से शुरू हुई यह यात्रा अपने 6वें वर्ष में इलाहाबाद आ पहुंची। अगले महीने नैनिताल में शो है। ‘ऐसा ही होता है’

Thursday, 18 November 2010

सनी - यात्रा पर अग्रसर

सनी बड़ौदा की अण्डर 20 की टीम में आ गया है। प्रीमियर लींग में बढ़िया पर्फोम कर रहा है। अब रणजी में फिर, आईपीएल और फिर टीम इण्डिया, इस यात्रा पर अग्रसर मकतू
जीवन सुन्दर है।

देवउठनी ग्यारस और ईद भी बहुत अच्छा,

देवउठनी ग्यारस और ईद भी बहुत अच्छा, मैं मौत के साय में का शो करके सफलतापूर्वक भोपाल वापस आय़ा। 

सनी का बर्थडे बहुत अहम

इस बार भी दीवाली और 13 नवम्बर को मेरे बेटे सनी का बर्थडे बहुत अहम रहा। 4 साल बाद पूरा परिवार साथ में था। बातें, खाना, पार्टी, पूजा सब साथ। सच अद्भुत।

Wednesday, 10 November 2010

जय रंगमंच

भोपाल लौटा हूं, दो दिन हुए, फिर मुम्बई और पूना। ‘मौत के साये’ में का शो है। फ्लाइट पकड़नी है। भोपाल लौटकर ताम्रपत्र की रिहर्सल में जुटना है। आदि विद्रोह में शो है। जय रंगमंच

चेखव, इबसन, मिलर सब मंच पर जीवित हो उठे।

पिछले दस दिनों से लखनऊ में था, भारतेन्दू नाट्य अकादमी में काम कर रहा था, सुबह 7 से रात 1 बजे तक काम ही काम, इससे अच्छा और क्या हो सकता है।

बीएनए द्वितीय वर्ष के छात्रों के साथ वेस्टर्न रियलिस्टीक वर्क, 2 घंटे का प्रजेन्टेशन ऑडिटेरियम में किया, चेखव, इबसन, मिलर सब मंच पर जीवित हो उठे।


लखनऊ के पास देवा शरीफ गया, सूफी संत वारिश शाह की दरगाह वहां है, बड़ा अच्छा लगा

Monday, 18 October 2010

फिल्म एक्टर्स के साथ नया अनुभव

आज मुम्बई जा रहा हूं, कल से नाटक की ब्लाकिंग शुरु करनी है। फिल्म एक्टर्स के साथ नया अनुभव।

भद्रजन हर कहीं गंदगी और कचरा फैलाने में मशगूल

मैंने कई बार पाया कि हम भारतीय भद्रजन हर कहीं गंदगी और कचरा फैलाने में मशगूल हैं, यह अहसास पिछले दिनों और अधिक पुख्ता हो गया जब बौद्ध (गया) मंदिर में मैंने देखा वहां एक सज्जन हाथ से झाडू लगा रहे थे और दूसरे हाथ से प्रसाद बांट रहे थे। कुछ लोग थूकने में व्यस्त थे। इन सबके बीच राष्ट्रीय समुदाय के पर्यटक अचंभित होकर देख रहे थे कि इस समाज में बुद्ध कहां से आए होंगे या शायद इस समाज के लिए ही बुद्ध का जन्म हुआ हो। नमो: बुद्धाय

Tuesday, 5 October 2010

लगा की यूरोप के किसी शहर में बैठे है.

3 अक्टूबर 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुहत देखकर लगा नहीं की ये खेल भारत में हो रहे है. यूँ लगा की यूरोप के किसी शहर में बैठे है.

आखिर युवा भारत ने दिखाई परिपक्वता

30 सित 2010 भारत के इतिहास का एक स्वर्णिम दिन, युवा भारत ने राजनीति और धर्म के ठेकेदारों को ठेंगा दिखा दिया. मंदिर मस्जिद के नाम पर अपनी दुकाने चलने वाले सावधान. अब तुम्हारे बुरे दिन शुरू हो गए. आखिर युवा भारत ने परिपक्वता दिखाई