रंगमंच क्या है? पीटर ब्रूक के शब्दों में, "ये EMPTY SPACE में पैदा होता है| EMPTYNESS ही स्पेस को जादुई बनाता है|" यहाँ जीवन की भावनाओं के गहरे रंग दिखाई देते हैं, महसूस होते हैं और हमें कहीं भीतर से सोचने को मजबूर करते हैं| क्यूँ नहीं बनता कोई इंजीनियर, डॉक्टर, वक़ील, बिज़नेस मैन या फिर कुछ और? क्यूँ सुनता है वो इस रंगमंच की दुनिया को? सिर्फ इसलिए कि यहाँ देश, देह और काल से मुक्ति मिलाती है| नहीं होतीं जटिल गुत्थियाँ दफ़्तरों की| बाज़ार का मोलभाव नहीं होता और न होते हैं कोई अभाव| होती हैं आँखों में सपनीली परछाइयाँ सृजन की| वन-वन भटकते हुए राम हम ही होते हैं| लंका में दहाड़ते रावण हम ही हैं| कंस के कारागार में पैदा होते कृष्ण हम हैं; तूफानों में भटकते किंग लीयर हम ही हैं| भावनाओं के झंझावात में फँसकर भ्रमित होने वाले हैमलेट भी हम ही हैं| इसलिए चुनते हैं हम रंगमंच की दुनिया को; क्योंकि ये एक जादुई दुनिया है!
प्रतिक्रया की प्रतीक्षा में आपका दोस्त आलोक!

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