Thursday, 5 November 2009

स्तानिस्लाव्स्की


स्तानिस्लाव्स्की यथार्थवादी अभिनय की खोज में बहुत बेचैन रहते थे.
अपने आदर्श और मूल्यों को प्राप्त करने के लिए वे किसी भी सीमा तक जाते थे.
ग्रीक नाटक का मंचन करने के लिए वे अपने समूचे अभिनेताओं को एथेंस ले गए थे
और वही एक महीने  रिहर्सल कराई थी,
तो वही गोर्की के नाटक Lower Depth में अपराधी, गरीब और झुग्गीवासियों के जीवन दिखाने
उन्होंने अपने अभिनेताओं को कई दिनों तक वास्तविक रूप से
उन्ही इलाकों में जाकर रहने को कहा था
ताकि अभिनेता उनके जीवन को करीब से देख सकें, महसूस कर सकें.
जीवन के बाद के वर्षों में भरतमुनि का नाट्यशास्त्र पड़ने से
उनकी सोच में आमूल-चूल परिवर्तन भी आया.
Anton Chekhov के Cherry Orchard को सात्विक अभिनय की तलाश में
उन्हें Musical Form में भी करते देखा गया.
नुक्कड़ नाटक हो,
संस्कृत नाटक हो
या यथार्थवादी
किसी भी प्रकार के नाटको में उनकी अभिनय पद्धति हमेशा काम आती है.
एक अर्थो में वे आधुनिक विश्व रंगमंच के पितामह है.
 ऐसे मनीषी और पितामह को शत्-शत् प्रणाम...

आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में, आपका दोस्त आलोक

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