आज बाल दिवस पर विश्व के सभी बच्चो को हार्दिक शुभकामनाये और बधाई...
वे ही भविष्य है समाज के आगामी निर्माता और नियंत्रक हैं
वे ही हमारी समूची मानवता के सच्चे उत्तराधिकारी हैं...
पर आज हमें अपने से ये भी पूछना चाहिए की आखिर किस प्रकार की दुनिया हम उनके लिए छोडेंगे
ग्लोबल वार्मिंग,आण्विक हथियार,वैश्विक आतंकवाद और भौतिकतावादी अंधी दौड़ से भरी कौन सी दुनिया
उनका क्या भला करेगी...
आज बाल दिवस पर हमें ये भी सोचना चाहियें की स्कूल आज यातनागृहों में बदल रहें है
जहाँ बच्चे रट्टू तोतों की तरह पाठ पढ़ रहें है समझ तो पता नहीं क्या रहें हैं ?
क्योंकि समझानेवाला शिक्षक ही माडलों जैसे निर्दयी रिंगमास्टर में बदल गए हैं ...
कविता की जगह जिंगल ने और कहानी की जगह अश्लील सन्देश लेते जा रहे हैं...
ऐसे समाज में हमें बच्चों को सच्ची खुशी, मुस्कराहट, देखभाल और संस्कार देना चाहियें ..
साथ ही कोशिश करनी चाहिये कि सबसे कीमती चीज बची रहें जो है
मासूमियत...
जिसे बच्चे अनजाने ही खोते जा रहे हैं..
बच्चो....
हम सभी बड़ों को माफ़ करना...
हम बडें ही इअसके लिए जिम्मेदार हैं...
तुम्हारी जिंदगी में
हंसी..
कविता..
परियां..
तितली..
रंग..
हमेशा मौजूद रहें....
हैप्पी बाल दिवस.......
आपका दोस्त आलोक चटर्जी ....
(१४ नव. दोपहर २:३८ )

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