ओ! मस्तक विराट! अभी नहीं मुकुट, अभी नहीं अलंकार! अभी नहीं तिलक, अभी नहीं राज्य-भार! एक दिन माथे मेरे, सूर्य होगा उदीय, इतना पर्याप्त मुझे अभी! -कुंअर नारायण सिंह "एक्टिंग इज इटरनल जर्नी टु नो द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर." -मर्लिन ब्रांडो
Thursday, 12 November 2009
तुम्हारे जन्मदिन पर
तुम्हारे जन्मदिन पर नहीं लिख सकता कोई कविता
दोनों हाथ उठाकर,ईश्वर से करता हूँ प्रार्थना
तुम सफल, यशस्वी, पराक्रमी बनो,
निर्भय बनो,
जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त करो तुम
मानवता का करुणा का सागर का लहराता रहें भीतर हमेशा तुम्हारे
कोई सीख, आदेश नहीं दे सकता मै तुम्हें
बल्कि तुमने ही बार-बार निर्देशित किया है मुझे
इक सपना हो तुम मेरा,
जो रूप धर आया है मेरे जीवन कि बगिया में
सनी मै तुम पर कोई कविता नहीं लिख सकता
क्योंकि तुम मेरी सबसे अच्छी कविता हो....
तुम्हारा डैडू....
सायं ७:५० मै मेरे ड्राइंग रूम में
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