Thursday, 12 November 2009

जीवन









जीवन स्वयं प्रवाहमान है...
समय कि भांति..
उसे पकड़ने कि कोशिश नहीं करना चाहिए.
स्वयं को प्रवाह में समर्पित कर देना चाहिए..
बहने देना चाहिए......


(१३ नव.प्रातः ११:०५ )

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