ओ! मस्तक विराट! अभी नहीं मुकुट, अभी नहीं अलंकार! अभी नहीं तिलक, अभी नहीं राज्य-भार! एक दिन माथे मेरे, सूर्य होगा उदीय, इतना पर्याप्त मुझे अभी! -कुंअर नारायण सिंह "एक्टिंग इज इटरनल जर्नी टु नो द इन्टरनल वर्ल्ड ऑफ़ एन ऐक्टर." -मर्लिन ब्रांडो
Sunday, 8 November 2009
अलग सुबह
सुबह अंधेर 5:45
सड़क किनारे अलाव तापते कुछ ऑटो वाले प्रतीक्षा कर रहे है, पहले ग्राहक की.
जिससे शुरू हो रोजी रोटी का एक और दिन
सफाईवाली स्त्रियाँ मुंह पर कपडा लपेट झाडू लगाने के पहले
सुड़क रही है चाय खुद को सर्दीली सुबह में गर्म करने के लिए
छोटे बच्चे साइकिलों पर पेपर बाँट रहे है
और देख रहे है उन बच्चो को
जो तैयार होकर माँ के साथ स्टाप पर
स्कूल बस की प्रतीक्षा कर रहे है.
वे अपने बचपन को देख रहे है लाचार
और पहुंचा रहे है हमारे आपके यहाँ ताजा अखबार
कुछ महिलाये अपनी चर्बी कम करने Morning Walk पर जाती है.
पर जारी है वहां पर भी सास देवर ननद की बातें
एक पचपन साल का व्यक्ति बगीचे में योग करता है खुद को फिट रखने के लिए
कुछ वृद्ध जीवन को रंगों से भरने निरर्थक लगाते है हास्य क्लब का ठहाका
घरों में चाय के बर्तन खड़कने की आवाजें है. कहीं पूजा के मंत्र स्वर है.
कुछ फूल तोड़ने बेचने वाले भी है
दूध के पैकेट बांटता लड़का है.
बर्तन साफ करने वाली महरी है.
जो तेज जाती है काम पर क्योंकि आठ बजे तक उसे घर लौटना है.
आदमी का खाना बनाने,
बच्चो को दूध पिलाने,
यूँ होती है हर सुबह हमारे आपके आस पास
इसकी खदबदाहटों, गुनगुनाहटों, सरसराहटों
को क्या हम देख-सुन रहे है....?
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i like ur writing your view about things is simply great & i am a great fan of your writing now
ReplyDeletesahaj ghatnao ko mili shabdo ki asadharn evm sahaj akriti...
ReplyDeletethat's a perfct word's to discribing abt mango people's...I like ur way of thinking dada...!!!!
ReplyDeleteSir I want to learn from you. Sir how may I contact you
ReplyDeleteआलोक जी आपने ब्लॉगिंग बंद क्यों कर दी है मैं सोचता हूं कि आपके कंटेंट फेसबुक पर आएं परंतु ब्लॉगिंग जारी रहे उम्मीद है कि मेरे सुझाव पर गौर करेंगे
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