Saturday, 14 November 2009






आज एक आवाज़ सुनी 
वो आवाज़ कभी मेरे लिए भी गाती थी


कोई गीत उसने मेरे लिए गाया था 
कोई एक नाम भी उसने दिया था मुझे 


वो गीत गुम गया है 
वो नाम कहीं खो गया है 


आज फिर उस आवाज़ में 
उस पुराने क्षण को महसूस किया मैंने 
अतीत की धुंध में खो गया मैं 


संबंधों के मकड़जाल ने 
कहीं रिश्ते को जकड लिया


अब एक गहरी उदासी भरी 
शाम है 


इन्तजार करती आँखें 
और कान हैं 


एक अनवरत दारुष प्रतीक्षा है....

(१४ नव.०९ दोपहर २:४७)

1 comment:

  1. good 1
    might be in the memory of mother

    you are an acting teacher plz write abt acting as well actually we want daily column on acting

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